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सीबीटी, सीडीटी और एसडी थैरेपी से कैंसर उपचार में बेहतर परिणाम आए सामने

सीबीटी, सीडीटी और एसडी थैरेपी का उपयोग कैंसर उपचार में एक वरदान के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। एडवांस स्टेज के कैंसर रोगियों में भी उपचार के बेहतर परिणाम के लिए यह थैरेपी मददगार साबित हो रही है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में उत्तर भारत के पहले साइको ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से दी जा रही यह थैरेपी सभी तरह के कैंसर रोगियों में कारगर साबित हो रही है। इस थैरेपी के जरिए रोगियों के इम्यून सिस्टम की क्षमता को बढाया जाता है, जिसके रोगी में कैंसर रोग से लडने की क्षमता बढ रही है।
साइको ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष आरती होता ने बताया कि (सीबीटी) कॉगनेटिव बिहेवियर थैरेपी, (सीडीटी) कॉगनेटिव ड्रिल थैरेपी, (एमईटी) मोटिवेषनल इंहैंसमेंट थैरेपी, (सीडीटी) सिस्टमेटिक डी सेंसटाइजेषन थैरेपी और डिगनिटी थैरेपी अहम है। इन थैरेपी के जरिए रोगियों की सोच, मनोभाव, व्यवहार को बदलते हुए उनकी मनोस्थिति को रोग से लडने के लिए तैयार किया जाता है। इस थैरेपी की आवष्यकता रोगी को रोग की पहचान के साथ ही सम्पूर्ण उपचार के दौरान होती है। कैंसर उपचार की तीनों अहम पद्वतियों (मेडिकल, सर्जिकल और रेडिएषन) के साथ यह थैरेपी एक स्तंभ के रूप में कार्य करती है। उपचार के दौरान अगर रोगी में तनाव का स्तर कम हो तो उपचार के परिणाम भी तनावग्रस्त रोगी के मुकाबले काफी बेहतर आते हैं।
चार साल का बच्चा, बैगेर एनेस्थीसिया दी आरटी
बिहेवियरल थैरेपी के तहत दी जाने वाली थैरेपी सिस्टमेटिक डी सेंसटाइजेषन के बच्चों में काफी बेहतर परिणाम सामने आए है। जिसके तहत चार साल के बच्चें को भी बगैर एनेस्थीसिया रेडिएषन थैरेपी (आरटी) दे पाना संभव हो पाया है। आरती ने बताया की आरटी के दौरान अगर पेषेंट कोई मूवमेंट करता है तो थैरेपी का शरीर के सामान्य सेल पर नकारात्मक प्रभाव पड सकता है। बच्चों को एनेस्थीसिया देकर ही आरटी दी जाती है। सीडीटी के बाद इन बच्चों को बगैर एनेस्थीसिया आरटी देना संभव हो पाया है।
साइड इफेक्टस का कम करने में भी मददगार 
पेलिएटिव एवं सर्पोटिव केयर की विभागाध्यक्ष डॉ अंजुम खान ने बताया कि रोगी के उपचार के दौरान असहनीय दर्द के साथ ही कई साइड इफेक्ट की स्थिति सामने आती है। ऐेसे में रोगी के दर्द को कम करने के लिए कई तरह की दवाओं की सहायता ली जाती है। रोगियों को दवा के साथ ही जब सही काउंसलिंग और मनोबल को बढाया जाता है तो रोगी की दवाओं का असर भी प्रभावी होता है। पेलिएटिव और सर्पोटिव केयर और साइको थैरेपी रोगी के स्वस्थ होने में अहम भूमिका निभा रही है।
देशभर में तेजी से बढ रहे कैंसर रोगी 
बीएमसीएचआरसी के मेेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ ललित मोहन शर्मा ने बताया कि देश में 2.5 मिलियन लोग कैंसर के साथ अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। इसके साथ ही देश में हर साल 11 लाख 57 हजार 294 कैंसर रोगी सामने आ रहे हैं। वहीं 7 लाख 84 हजार 821 लोग इस रोग की वजह से अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। पुरूषों में मूंह, फेफडे और पेट के कैंसर तेजी से बढ रहे हैं, जबकि महिलाओं में स्तन और गर्भाशय के कैंसर सर्वाधिक सामने आ रहे हैं। डॉ. ललित ने बताया कि जागरूकता की कमी के चलते आज भी कैंसर रोगी रोग की बढ़ी हुई अवस्था में चिकित्सक के पास पहुंचते है, जिसकी वजह से उपचार के दौरान रोगी के मन में हमेेशा यह भय रहता है कि वह पूरी तरह ठीक हो पाएगा भी या नहीं। चिंता और भय का रोगी के उपचार पर नकारात्मक प्रभाव पडता है।
कैंसर से बचाव है संभव
तंबाकू (बीडी, सिगरेट, गुटखा) एवं गलत जीवनषैली (जैसे व्यायाम नहीं करना, ज्यादा तेल, मसाले का भोजन का सेवन) को छोड दिया जाए तो कैंसर की रोकथाम संभव है। सरवाईकल कैंसर का टीकाकरण (6 माह के अंतराल में) करवाकर महिलाएं इस रोग से खुद को बचा सकती है। 40 की उम्र के बाद महिलाओं को स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी और बच्चेदानी के मुंह के कैंसर की जांच के लिए पैप स्मीयर हर वर्ष करवानी चाहिए।
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